फ़िल्म समीक्षा मीठी - माँ कु आशीर्वाद
"मीठी - माँ कु आशीर्वाद" क्षेत्रीय सिनेमा पर एक ताज़ा और समकालीन दृष्टिकोण है, जो उत्तराखंड के फिल्म उद्योग में नई जान फूँकता है। उत्तरकाशी जिले के सुंदर लेकिन अक्सर नज़रअंदाज़ किए जाने वाले गांव जखोल में शूट की गई यह फिल्म मीठी की प्रेरक कहानी बताती है, जो एक साधारण गाँव की लड़की से एक मशहूर मास्टर शेफ़ का सफ़र तय करती है।
वैभव गोयल द्वारा निर्मित, यह फिल्म प्रवासी उत्तराखंडी आबादी के मन की टीस और पुरानी यादों को स्पर्श करती है, जिनमें से कइयों ने बड़े शहरों में सफलता हासिल की है, लेकिन अभी भी अपनी जड़ों से गहरा जुड़ाव रखते हैं। इस विषय को एक समाचार चैनल प्रमोटर की नज़र से शक्तिशाली ढंग से व्यक्त किया गया है, जो कथा में गहराई की एक परत जोड़ता है।
मीठी की मुख्य भूमिका निभाने वाली मेघा खुगसाल ने एक सराहनीय प्रदर्शन किया है, जिसमें एक साधारण गाँव की लड़की से एक आत्मविश्वासी, कुशल शेफ़ बनने के अपने किरदार के सफ़र को अभिनय के सहारे पूरा किया है। सहायक भूमिका में मोहित घिल्डियाल ने अपने स्वाभाविक और सहज चित्रण से चमक बिखेरी है, खास तौर पर पौड़ी और श्रीनगर क्षेत्रों की गढ़वाली बोली में उनके संवाद अदायगी में साफ़ दिखाई देते हैं।
फ़िल्म की संरचना, जो फ़्लैशबैक और वर्तमान के बीच झूलती है, कई बार असंगत लग सकती है, लेकिन अंततः कहानी को अच्छी तरह से पेश करती है। मध्यांतर से पहले, पवनदीप राजन का गाया और आर नेड का संगीतबद्ध किया गया भावपूर्ण और कर्णप्रिय गीत "जगवाल" मीठी के अपने गाँव से देहरादून तक के सफ़र के बदलाव को खूबसूरती से दर्शाता है, जो उसके सामने आने वाली चुनौतियों की भूमिका बनाता है।
फ़िल्म के दूसरे भाग में मीठी का एक शहरी लड़की में तेज़ी से रूपांतरण होता है, और मास्टरशेफ़-शैली की प्रतियोगिता में प्रवेश करने के साथ ही फ़िल्म की गति बढ़ जाती है। यहाँ, मीठी का उपहास और व्यंग्य किया जाता है, जो सफलता की सीढ़ी चढ़ने के दौरान उसके सामने आने वाले संघर्षों को उजागर करता है।
निर्देशक कांता प्रसाद दर्शकों को एक ऐसी यात्रा पर ले जाते हैं, जिसमें न केवल उत्तराखंड के पाक-कला के व्यंजनों को दिखाया जाता है, बल्कि बाजरे जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों के महत्व को भी दर्शाया जाता है, तथा उनके पोषण संबंधी लाभों पर जोर दिया जाता है। फ़िल्म के आख़िर में मीठी की अप्रत्याशित सफलता को विवेक नौटियाल का ‘मीठी रस्वाल’ गीत जोशीले अंदाज में पेश करता है, जो युवा पीढ़ी की पसंद पर खरा उतरता है।
"मीठी - माँ कु आशीर्वाद" एक जीवंत, उत्साहवर्धक फिल्म है, जो गढ़वाली बोली में क्षेत्रीय सिनेमा की नई पीढ़ी की उम्मीदों को रूपहले पर्दे पर दर्शाती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो युवाओं और पुरानी पीढ़ी दोनों को पसंद आती है, जो उत्तराखंड के लोगों और उनकी मातृभूमि के बीच स्थायी बंधन पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह फिल्म शायद वह चिंगारी हो जो प्रवासी उत्तराखंडियों को सिनेमा के माध्यम से अपनी समृद्ध संस्कृति और विरासत का जश्न मनाते हुए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन पर वापस खींच लाए।
- एस मुरलीधर
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