उत्तराखंड की महिलाओं ने ‘भोजपत्र’ पर लिखी उद्यमिता की दास्तान
पौराणिक काल से ‘भोजपत्र’ अभिलेखों और पांडुलिपियों को सुरक्षित और संरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण साधन रहा है।अब वही भोजपत्र उत्तराखंड की महिलाओं की उद्यमशीलता और कौशल को परवाज़ देने का ज़रिया बन रहा है।
आजकल भोजपत्र पर लिखे संदेश, श्लोक, आरती और त्योहारों के शुभकामना संदेश काफ़ी लोकप्रिय होते जा रहे हैं जो कि उत्तराखंड के माणा गांव की महिलाओं ने अपने विशेष कौशल से निखार कर बनाए हैं।
ग़ौरतलब है कि सैलानी भी इनके अच्छे दाम देने के लिए तैयार हैं। भोजपत्र पर लिखे एक संदेश की कीमत ₹ 800 से लेकर ₹1,200 प्रति पीस के बीच है। सैलानियों के अलावा चार-धाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं भी भोजपत्र पर लिखे धार्मिक संदेश ख़रीदने को इच्छुक दिखाई दे रहे हैं।
भोजपत्र में लिखे संदेशों की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि अकेले बद्रीनाथ धाम से महिलाएँ बढी संविक्रय कर चुकी है।
दरअसल में यह सिलसिला शुरू हुआ पिछले साल अक्टूबर में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बद्रीनाथ यात्रा के दौरान माणा और नीती घाटी की आदिवासी महिलाओं से मिले। मुलाक़ात के दौरान इन महिलाओं ने प्रधानमंत्री को भोजपत्र पर लिखा एक संदेश उपहार में दिया था।
प्रधानमंत्री को भोज-पत्र उपहार देने के बाद मिले मीडिया कवरेज से प्रोत्साहित होकर इन महिलाओं ने भोजपत्र पर लिखे संदेशों को व्यवसायिक तौर पर विपणन करने के मौक़े तलाशने शुरू किए।
देखते ही देखते ये महिलाएँ भोजपत्र पर संदेश लिखने की कला में पारंगत हो गई और अब उनके भोजपत्र संदेश हिलांस शॉप से बेचे जा रहे हैं। वहीं कुछ महिलाएँ अपना काम खुद भी बेच रही हैं।
चमोली ज़िला प्रशासन भी क्षेत्र की महिलाओं की मदद के लिए आगे आया है और इनके कौशल विकास के लिए एक विशेष सुलेख कार्यशाला का आयोजन भी किया है। कार्यशाला का उद्देश्य है कि महिलाएँ ना सिर्फ़ सुंदर हस्तलिखित सुलेखों को भोजपत्र पर लिख पाएँ बल्कि इनकी गुणवत्ता और उत्पाद को बढ़ावा देने के कौशल में भी दक्षता हासिल करें ।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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