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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा हुए आक्रमक, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 को बताया ‘खोखला’

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष करन माहरा ने उत्तराखंड की धामी सरकार के खिलाफ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 को लेकर चौतरफ़ा मोर्चा खोल दिया है। माहरा का कहना है कि भाजपा जिस तरह की बातें-दावे और दिखावा करती है वह सब झूठा और खोखला है, उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 इन्वेस्टर समिट 2018 का रेप्लिका मात्र है।

सवालों की फ़ेहरिस्त जारी करते हुए माहरा ने धामी से जवाब माँगा है कि अब तक धामी सरकार ने इन सवालों का नहीं दिया जिस पर भाजपा नेता और प्रवक्ता भी चुप्पी साध बैठें हैं। मैकेंजी ग्रुप पर निशाना साधते हुए माहरा ने कहा कि मैकेंजी एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी है जिसे ₹2 लाख 50 हजार प्रतिदिन किस मद से दिये जा रहे हैं? राज्य सरकार द्वारा कंपनी को सालाना ₹80 करोड़ देकर आज लगभग एक साल बीत जाने के बाद उत्तराखंड राज्य मैकेंजी से किस तरह लाभान्वित हुआ?

अपनी बात आगे रखते हुए माहरा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के शासन में बिना इन्वेस्टर्स समिट के प्रदेशभर में सिडकुल के तहत छोटे-बड़े 2000 उद्योग स्थापित किये गये, वर्तमान सरकार बताए कि उनमें से कितने उद्योग अब तक उत्तराखंड से पलायन कर गये है?
स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर मुहैया करवाने को लेकर माहरा ने पूछा कि पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के शासन में स्थानीय बेरोजगारों के लिए स्थापित उद्योगों में 70% आरक्षण की व्यवस्था की गई थी जिसे भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया है, इसके विपरीत एम्स जैसे संस्थानों में दूसरे प्रदेशों के लोगों को रोजगार देकर स्थानीय बेरोजगारों के हकों पर डाका क्यों डाला जा रहा है?

माहरा ने 2018 में कराए गए इन्वेस्टर समिट में 1 लाख 25 हजार करोड़ के इन्वेस्ट का दावा कर 7 लाख लोगों को रोजगार देने के बड़े बड़े होर्डिंग बोर्ड के प्रचार का ज़िक्र करते हुए पूछा कि कितने बेरोजगारों को रोजगार मिला सरकार स्पष्ट करना चाहिए? निवेशकों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री के लंदन रोड शॉ का हवाला देते हुए माहरा बोले कि जो उद्योग पूर्व से ही स्थापित हैं तथा उनके कार्यालय दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव में हैं, उनसे एमओयू लंदन में क्यों हो रहे हैं?

माहरा ने पूछा कि विद्युत उत्पादक राज्य होने के बावजूद प्रदेश में बिजली की आपूर्ति लगातार बाधित हो रही है और विद्युत की दरें भी अन्य कई राज्यों से अधिक क्यों हैं?आपदा प्रबन्धन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में इसी राज्य की 400 से ज्यादा सड़के तीन महीने से भी अधिक समय तक बाधित रही ऐसे में पर्वतीय अंचलों में निवेश कैसे पहुंचेगा?

धामी सरकार की भूमि आवंटन नीति पर प्रहार करते हुए माहरा ने दावा किया कि पूर्व की कांग्रेस सरकारों में उद्योगों को जिस भी प्रयोजन से भूमि आवंटित कराई जाती थी, वह उसी के तहत भूमि इस्तेमाल की जाती थी अन्यथा भूमि राज्य सरकार में निहित हो जाती थी। परन्तु भाजपा सरकार ने आत्मघाती निर्णय लेते इस नियम को दरकिनार कर प्रावधान समाप्त कर दिया।

हिमालयन लाइव ब्यूरो

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