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उत्तराखंड का अंतिम गाँव माणा अब बना भारत का पहला गाँव

भारत-तिब्बत सीमा पर उत्तराखंड का सीमांत गाँव माणा अब तक देश के आख़िरी गाँव के तौर पर पहचाना जाता था लेकिन अब इसे भारत के प्रथम गाँव का दर्जा मिल गया है।

सीमा सड़क संगठन यानि कि Border Road Organisation (BRO) ने औपचारिक तौर पर माणा गाँव के प्रवेश द्वार पर भी ‘भारत का प्रथम गाँव माणा’ का साइन बोर्ड लगा दिया गया है। माणा गाँव भारत-तिब्बत सीमा से 26 किलोमीटर पहले है जबकि विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम से महज़ तीन किलोमीटर की दूरी पर है।

पिछले साल 21 अक्टूबर को माणा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा माणा को भारत के अंतिम गांव बताने के बजाय देश का पहला गांव कहे जाने पर मुहर लगाते हुए कहा था कि ‘‘अब तो मेरे लिये भी सीमाओं पर बसा हर गाँव देश का पहला गाँव ही है। पहले जिन इलाकों को देश के सीमाओं का अंत मानकर नजर अंदाज किया जाता था, हमने वहां से देश की समृद्धि का आरंभ मानकर शुरू किया। लोग माणा आएँ, यहाँ डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा है,”।

केन्द्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत माणा गाँव को वाइब्रेट विलेज का दर्जा भी मिल चुका है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का विकास, ग्रामवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार, स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और विरासत को बढ़ावा देकर पर्यटन क्षमता का लाभ उठाना और समुदाय आधारित संगठनों, सहकारी समितियों और गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से एक गांव एक उत्पाद की अवधारणा पर पर्यावरण स्थायी पर्यावरण-कृषि व्यवसायों को विकसित करना है।

वाइब्रेंट विलेज कार्य योजनाएं जिला प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायतों के सहयोग से तैयार की गई हैं। इससे इन क्षेत्रों के उत्पादों जड़ी-बूटियों, सेब, राजमा सहित फसलों के साथ-साथ यहां विकास की संभावनाओं को पंख लगेंगे। इन क्षेत्रों में एक गांव एक उत्पाद योजना के तहत ऊनी वस्त्रों का निर्माण किया जा रहा है। वाइब्रेंट विलेख योजना सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोकने में मददगार होगी तथा हमारे सीमांत क्षेत्रवासी देश की सुरक्षा में भी भागीदारी निभा सकेंगे।

हिमालयन लाइव ब्यूरो

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