टिहरी आंशिक डूब क्षेत्र के प्रभावित टीएचडीसी से नाराज
टिहरी योजना के तहत आंशिक डूब क्षेत्र के 25 प्रतिशत परिवारों के पुनर्वास को लेकर सरकार कोई निर्णय नहीं ले पाई है। बांध प्रभावित 2006-07 से नकद प्रतिकर के बदले जमीन देने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें न तो नकद प्रतिकर ही दिया गया है और न ही जमीन मिल पाई है। लंबे समय से यह मामला अधर में लटके होने से प्रभावितों में पुनर्वास निदेशालय और टीएचडीसी के प्रति खासी नाराजगी है।
पुनर्वास नीति के तहत बांध परियोजना से प्रभावित गांव के 75 प्रतिशत तक परिवारों का विस्थापन होने पर शेष 25 प्रतिशत परिवारों को भी पुनर्वास का लाभ दिया जाना था लेकिन वर्षों बाद भी भिलंगना और भागीरथी घाटी में आंशिक डूब क्षेत्र के करीब दर्जनभर गांव के 130 परिवारों को लाभ नहीं मिल पाया है।
सरोट के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रोशन लाल ने बताया कि मामला सिंचाई विभाग में वर्षों से लंबित पड़ा है। 2007 से पुनर्वास निदेशालय से भी लगातार पत्राचार किया जा रहा है लेकिन अभी तक मामले का निस्तारण नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि पुनर्वास निदेशालय की ओर से अप्रैल 2014 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भी पत्र भेजकर जमीन के लिए धन आवंटन करने का अनुरोध किया गया था लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय लिया जा सका है।
डीएम मयूर दीक्षित का कहना है कि टिहरी बांध परियोजना के आंशिक डूब क्षेत्र के अवशेष 25 प्रतिशत परिवारों को पुनर्वास सुविधा देने के मामले में अभी तक क्या प्रगति हुई है। इसे चेक करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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